नवरात्रों में मां पूर्णागिरि और मां बाराही धाम में उमड़ता है भक्‍तों का रैला

चंपावत, [दिनेश चंद्र पांडेय]: जनपद चंपावत में धार्मिक स्थलों की भरमार है। उन्नत चोटियों के साथ ही कई स्थानों पर मां भगवती और भगवान शिव के मंदिर लोगों की आस्था के केंद्र बने हैं। टनकपुर में मां पूर्णागिरि और देवीधूरा में मां बाराही धाम के साथ ही अनेक स्थानों पर नवरात्रों में भक्तों का रेला उमड़ता है। मुख्यालय में तो मंदिरों की तादात सबसे ज्यादा है। चैत्र नवरात्र के मौके पर यहां विशेष पूजा अर्चना के साथ ही जागर आदि का भी आयोजन होता है।मां बाराही धाम
मुख्यालय के उन्नत चोटी में जहां मां हिंग्लादेवी का वास है। वहीं मादली गांव में ज्वाला देवी लोगों की मन्‍नतें पूरी करती हैं। उत्तर वाहिनी गंडक नदी के किनारे पर शिव धाम डिप्टेश्वर में मां दुर्गा के साथ ही पंच मुखी हनुमान, लक्ष्मी नारायण के मंदिर हैं। भगवान विष्णु के रूप में कूर्म का अवतार क्रांतेश्वर चोटी पर हुआ था, जहां भगवान शिव का मंदिर है और इस स्थल पर शक्ति के अंदर शिव लिंग पूरी तरह समाया हुआ है। 
नगर में बालेश्वर, चंपा देवी, भैरव, नागनाथ, लक्ष्मी नारायण, हनुमान, गोरल मंदिरों में भक्त पूरे वर्ष भर शीश नवाते हैं। महाभारत कालीन घटोत्कच्छ मंदिर, मानेश्वर महादेव, हिडंबा देवी, भीम पादुका, गुरू गोरक्ष नाथ की कर्म स्थली गोरखनाथ में सतयुग से जल रही अखंड धूनी आज भी प्रज्वलित है। 
लोहाघाट में कड़ाई देवी मंदिर, अखिलतारिणी, भगवती मंदिर सुई, आदित्य देव मंदिर, पूर्णागिरि धाम मानेश्वर, चमू बाबा चौखाम, ऐड़ी मंदिर व्यानधूरा, झूमादेवी, देवीधार, लड़ी धूरा सहित तमाम मंदिर अपनी आध्यात्मिक व चमत्कारिक मान्यता के लिए भक्तों की आस्था के केन्द्र हैं। इन मंदिरों चैत्र व शारदीय नवरात्रियों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।
देव डंगरिये देते हैं आशीर्वाद
चैत्र नवरात्र पर प्राचीन मंदिरों के साथ ही गांवों में स्थापित सैकड़ों ईष्ट देवों के मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना होती है और ग्रामीणों के अलावा महानगरों व विदेशों में रह रहे पहाड़वासी भी इन दिनों पूजा करने यहां आते हैं। नौ दिनों तक मंदिरों में रात्रि जागरण के साथ ही जागर के आयोजन भी होते हैं, जिसमें देव डंगरियों द्वारा अवतरित होकर आशीर्वाद दिया जाता है।